संस्कृत और हिंदी शिक्षण विधि
भाषा शिक्षण कौशल
Ø भाषा कौशल चार प्रकार के होते है I
1. सुनना (श्रवण कौशल) L
2. बोलना (भाषण कौशल) S सूत्र – सुबोपली
3. पढ़ना ( पठन कौशल ) R
4. लिखना (लेखन कौशल ) W
Ø मरिया मांटेसरी के अनुसार = सुनना बोलना लिखना पढ़ना
L S W R
Ø यहाँ श्रवण और पठन कौशल का उदेश्य ग्रहण करना है I
Ø यहाँ भाषण और लेखन कौशल का अभिव्यक्ति करना है I
श्रवण कौशल
Ø श्रवण कौशल के द्वारा किसी ज्ञान को सुनना होता इस कौशल के द्वारा किसी ज्ञान को कानो के द्वारा उसका सुनने के साथ अर्थग्रहण करना ही श्रवण कौशल है I
Ø अगर कोई व्यक्ति जन्म से सुन नहीं सकता तो वह बहरा होता हे परन्तु इस बाधा के कारन वह जन्म से ही गूंगा भी होगा अत वह कभी बोल नहीं सकता है I
भाषण कौशल
Ø अपने आशय को प्रकट करने के लिए शब्दों का संघटित प्रयोग किया जाना ही भाषण कौशल है
Ø भाषण कौशल के सबसे महत्वपूर्ण वातावरण और पारिवारिक कारक अत्यधिक योगदान रखते है
Ø बालक सबसे ज्यादा भाषण कौशल का विकास अपने आस पास सामाजिक वातावरण से करता है
Ø छात्रों को भाषा कौशल की शिक्षा प्रारम्भ से ही देनी चाहिए अत: प्राथमिक स्तर पर उनके उच्चारण को सही रूप पढ़ना चाहिए जिसे माध्यमिक या उच्च माध्यमिक स्तर पर किसी भी प्रकार की कठनाई नहीं हो सके
पठन कौशल
Ø उदेश्य
Ø गति लय पूर्वक उच्चारण करवाना ( प्राथमिक स्तर हेतु)
Ø भावो के अनुकूलन शब्दों में यति देकर तथा अभिनय पूर्वक पठन करना ( माध्यमिक स्तर हेतु)
Ø सर्जनात्मक शक्ति का विकास स्वशैली का विकास (उच्च स्तर हेतु)
पठन के प्रकार
Ø आदर्शवाचन = शिक्षक द्वारा
Ø अनुकरण वाचन = छात्रो द्वारा
Ø समवेतवाचन = समूह में छात्रों द्वारा
Ø मौन वाचन
1. सामान्य मौन वाचन
2. गंभीर मौन वाचन
3. द्रुत मौन वाचन
Ø पठन कौशल की विधि
1. अक्षर बोध विधि
2. पद पद्वति
3. वाक्य पद्वति
4. कथा पद्वति
लेखन कौशल
Ø अंतिम कौशल लेखन कौशल
Ø भाषा को लिपिबंध करना
Ø भाषा के स्वरूप को स्थायित्व प्रदान किया जाता है I
Ø यहाँ वर्तनी का महत्व होता है
उदेश्य
Ø अक्षर शब्द वाक्य के स्वरूप का ज्ञान
Ø भावो को लिपिबंध करना
Ø पढ़े हुए विषय को लिखित रूप में अभिव्यक्त करना
लेखन कौशल की विधियाँ
Ø दुष्टलेखन विधि ( जेकाटाट पद्वति)
1. शिक्षक द्वारा लिखे गए शब्दों का अनुकरण करके छात्र लिखता है I
2. प्राथमिक स्तर हेतु
श्रुतलेखन विधि
छात्रों द्वारा सुनकर लिखना
प्राथमिक और माध्यमिक स्तर हेतु
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